Latest News

Breaking News 8 March 2025

1.) World War 3 Begins ! 

 

यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग अब नए मोड़ पर है, और इस बार डोनाल्ड ट्रंप इसे खत्म करने के लिए आगे आए हैं। लेकिन क्या ट्रंप सच में यूक्रेन को बचाने निकले हैं, या फिर यह सब रूस के लिए ‘सॉफ्ट डील’ का हिस्सा है? ट्रंप की हालिया बयानबाजी कुछ और ही इशारा कर रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि युद्ध को खत्म करने के लिए रूस के साथ किसी अंतिम समझौते पर पहुंचना यूक्रेन की तुलना में ज्यादा आसान होगा। यानी, वह यह साफ कह रहे हैं कि समस्या यूक्रेन है, न कि रूस। ट्रंप का कहना है कि “अब सब कुछ पुतिन के हाथ में है,” और इस वक्त अमेरिका ने जो सैन्य सहायता रोकी है, उसके चलते रूस यूक्रेन पर ताबड़तोड़ हमले कर रहा है। ट्रंप ने अपनी ‘शांति योजना’ के तहत कहा कि वह यूक्रेन की मदद करना चाहते हैं, लेकिन यूक्रेन को गंभीरता दिखानी होगी। यानी, अगर यूक्रेन को जंग में समर्थन चाहिए, तो उसे शांति समझौते की ओर बढ़ना होगा। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने खुलासा किया कि अमेरिका और यूक्रेन के बीच बातचीत अगले हफ्ते सऊदी अरब में होगी। जेलेंस्की खुद वहां जाएंगे, जबकि उनकी टीम अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत करेगी। जब से अमेरिका ने यूक्रेन की सैन्य मदद रोकी है, रूस ने अपने हमलों की रफ्तार और तीव्र कर दी है। गुरुवार रात रूस ने 67 मिसाइलें और 194 ड्रोन से यूक्रेनी ठिकानों पर बमबारी की। रूस का पहला निशाना यूक्रेन की नेचुरल गैस निष्कर्षण सुविधाएं थीं। यूक्रेन की सबसे बड़ी निजी गैस कंपनी ‘डीटीईके’ ने खुलासा किया कि पिछले 15 दिनों में यह रूस का छठा बड़ा हमला था। इस बार यूक्रेन ने भी जवाबी हमला किया और पहली बार फ्रांस से मिले मिराज-2000 फाइटर जेट्स को उतारा। ये वही लड़ाकू विमान हैं, जिन्हें पिछले महीने फ्रांस ने यूक्रेन को सप्लाई किया था। यूक्रेनी सेना के पास पहले से ही अमेरिका और पश्चिमी देशों के F-16 लड़ाकू विमान हैं, जिनसे रूस की मिसाइलों को रोकने की कोशिश की जा रही है। इस पूरी बातचीत के दौरान ट्रंप ने भारत को लेकर भी एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि भारत अमेरिकी सामानों पर टैरिफ कम करने को राजी हो गया है। ट्रंप ने कहा, “भारत हम पर बहुत ज्यादा टैरिफ लगाता है। आप भारत में कुछ भी नहीं बेच सकते। यह लगभग प्रतिबंध की तरह है। लेकिन अब वे सहमत हो गए हैं और टैरिफ में कटौती करेंगे।” अब सवाल उठता है कि क्या यह बयान एक कूटनीतिक चाल है, या सच में अमेरिका-भारत व्यापारिक संबंधों में कोई बदलाव आने वाला है? ट्रंप का बयान एक स्पष्ट संकेत देता है अमेरिका अब सीधे युद्ध में उतरने के मूड में नहीं है। वह चाहता है कि यूक्रेन खुद शांति वार्ता की दिशा में बढ़े, भले ही इसका मतलब रूस के पक्ष में झुकाव हो। ट्रंप ने कहा, “रूस के साथ डील करना आसान होगा, क्योंकि उनके पास सभी कार्ड हैं।” इससे यह भी साफ हो जाता है कि अमेरिका अब यूक्रेन को यह संकेत दे रहा है कि अगर वह चाहता है कि यह युद्ध जल्द खत्म हो, तो उसे समझौते की टेबल पर आना होगा, चाहे कीमत जो भी हो। अब देखना यह होगा कि अगले हफ्ते सऊदी अरब में होने वाली बातचीत से क्या कोई नया मोड़ आएगा, या फिर यह सिर्फ ‘बातचीत के नाम पर जंग’ का एक और अध्याय बनकर रह जाएगा।

 

2. ) 26/11 Attack Justice 

 

2008 के मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा ने एक बार फिर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उसने भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका दायर करते हुए दावा किया है कि अगर उसे भारत भेजा गया, तो वह जल्द ही मर जाएगा। राणा ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि वह पाकिस्तानी मूल का मुसलमान है और भारत में उसे यातनाएं दी जाएंगी। इसके अलावा, उसने अपने बिगड़ते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा कि उसे पेट की गंभीर बीमारी, पार्किंसंस और कैंसर का खतरा है। उसने अदालत से अपील की है कि अगर प्रत्यर्पण के आदेश पर रोक नहीं लगाई गई, तो अमेरिकी अदालतें अपना अधिकार क्षेत्र खो देंगी और मैं जल्द ही मर जाऊंगा। अमेरिकी अदालतें पहले ही तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे चुकी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान कहा था कि उनका प्रशासन तहव्वुर राणा को भारत भेजने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप ने इसे लेकर अमेरिका के अब तक के फैसले को "बहुत बुरा" करार दिया था और कहा था कि राणा जैसे आतंकियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। तहव्वुर राणा पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली का बेहद करीबी सहयोगी है, जो 26/11 मुंबई हमले का मुख्य साजिशकर्ता था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, राणा के लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) से गहरे संबंध हैं। यह पहली बार नहीं है जब तहव्वुर राणा ने प्रत्यर्पण के खिलाफ अमेरिकी अदालत में अपील की है। इससे पहले भी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। बावजूद इसके, वह आखिरी कोशिश के तहत फिर से कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। भारत मुंबई हमले में उसके रोल को लेकर सख्त कार्रवाई करना चाहता है, लेकिन राणा अपने बचाव में स्वास्थ्य, धर्म और मानवाधिकारों का हवाला देकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट उसकी याचिका पर कोई नरमी दिखाएगा, या फिर उसे भारत प्रत्यर्पित करने का रास्ता साफ होगा। तो क्या तहव्वुर राणा भारत आकर कानून का सामना करेगा, या फिर कानूनी दांव-पेच से बचने की एक और कोशिश करेगा? आने वाले फैसले पर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।