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Breaking News 31 March 2025

1.) Ghibli Style Art क्या है और फ्री में कैसे बनाये ? 

सोशल मीडिया पर इन दिनों घिबली आर्ट का बोलबाला है। AI टूल्स ने ऐसा जादू चलाया है कि जिसे पेंटब्रश पकड़ना भी नहीं आता था, वो भी अब 'स्टूडियो घिबली स्टाइल' में अपनी फोटो बना रहा है। और मज़े की बात ये कि पहले यह सुविधा सिर्फ प्रीमियम यूज़र्स के लिए थी, लेकिन अब फ्री में भी लोग घिबली स्टाइल में अपनी तस्वीरें बना सकते हैं। यानी, अब डिजिटल भिखारी भी घिबली राजा बन सकते हैं! लेकिन ठहरिए, क्या आपको पता है कि ये 'घिबली' आखिर आया कहां से? और जिसे AI ने 'डिजिटल लूट' का शिकार बना लिया, वो कौन है? तो, स्टूडियो घिबली के जन्मदाता हायाओ मियाजाकी हैं, जिन्हें जापान का एनिमेशन सम्राट कहा जाता है। उन्होंने 25 से ज्यादा एनिमेटेड फिल्में और टीवी सीरीज़ बनाई हैं, जिनमें से 'स्पिरिटेड अवे' ने अकेले 275 मिलियन डॉलर (2300 करोड़ रुपये) कमा लिए थे। अब सोचिए, जिसे मियाजाकी ने सालों की मेहनत से बनाया, वही स्टाइल AI ने चुटकी में मुफ्त में सबको बांट दिया! AI के इस डिजिटल आक्रमण से मियाजाकी साहब खासे नाराज़ हैं। उन्होंने इसे "जिंदगी का अपमान" बताया है। उनका कहना है कि एनिमेशन सिर्फ लाइनों और रंगों का खेल नहीं है, बल्कि उसमें इंसानी भावनाएं और संवेदनाएं होती हैं। लेकिन AI इन सबसे बेपरवाह सिर्फ प्रॉम्प्ट के इशारों पर नाच रहा है। अब सवाल उठता है कि क्या AI के इस खेल से मियाजाकी की नेटवर्थ पर असर पड़ेगा? फिलहाल उनकी कुल संपत्ति करीब 50 मिलियन डॉलर (428 करोड़ रुपये) बताई जा रही है, लेकिन अगर यही हाल रहा, तो जल्द ही उनका बैंक बैलेंस भी AI टूल्स की तरह "फ्री में एक्सेसिबल" हो सकता है! अगर आप भी इस "AI घिबली क्लब" में शामिल होना चाहते हैं, तो आपको बस चैटजीपीटी 4o या मस्क के Grok AI पर जाना होगा। वहां एक सिंपल प्रॉम्प्ट डालें "स्टूडियो घिबली स्टाइल में एक परियों की दुनिया की इमेज बनाएं" और बूम! आपकी घिबली स्टाइल इमेज तैयार। अब इसे सोशल मीडिया पर डालकर वाहवाही लूटें और मियाजाकी साहब को और ज्यादा नाराज़ करें! तो आखिर में सवाल ये है…अगर AI ने मियाजाकी की कला को "मुफ्त माल" बना दिया, तो क्या कल को बड़े फिल्म डायरेक्टर, पेंटर और लेखक भी इसी तरह AI के शिकार बनेंगे? या फिर इंसानी क्रिएटिविटी हमेशा मशीनों से एक कदम आगे रहेगी?  हलाकि इतना तय है कि AI की दुनिया में अब हर कोई "घिबली" बना सकता है बस मियाजाकी को छोड़कर।

 

2.)  Ranveer Allahbadia Final Chapter 

 इंडियाज गॉट लेटेंट कॉन्ट्रोवर्सी के बाद रणवीर इलाहाबादी ने तोड़ी अपनी चुप्पी, सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई और जो कुछ सामने आया है, वो आप आगे की वीडियो में देखेंगे रणवीर ने खुलासा किया कि पर्दे के पीछे क्या-क्या हुआ, उनका टैलेंट कैसे लेटेंट में तब्दील हुआ 

 

3 ) : ईद पर कई शहरों में काली पट्टी बांधकर नमाज अदा

कर्नाटक में ईद-उल-फितर के जश्न के दौरान वक्फ संशोधन विधेयक का मुद्दा गरमाता नजर आया। सोमवार को कई शहरों में नमाजियों ने ईद की नमाज के दौरान काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। बीदर, मांड्या और बेलगावी समेत कई इलाकों में यह मौन प्रदर्शन देखा गया। बीदर में राज्य सरकार के मंत्री और खेल व युवा सशक्तिकरण विभाग के प्रमुख रहीम खान अपने समर्थकों के साथ काली पट्टी बांधकर ईदगाह पहुंचे और विरोध स्वरूप नमाज अदा की। उन्होंने केंद्र सरकार से इस विधेयक को वापस लेने की मांग की। मांड्या में मांड्या शहरी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नहीम ने भी इसी तरह विरोध जताया, उनके समर्थकों ने भी काली पट्टी बांधकर नमाज पढ़ी।बेलगावी में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के कार्यकर्ताओं ने काली पट्टी पहनकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कित्तूर में प्रदर्शनकारियों ने SDPI के राष्ट्रीय अध्यक्ष एम.के. फैजी की रिहाई की भी मांग उठाई। फैजी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था वक्फ (संशोधन) विधेयक को हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे अगस्त 2024 में लोकसभा में पेश किया था, जिसके बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया। हालांकि, पैनल में शामिल विपक्षी दलों के 11 सांसदों ने इसका विरोध करते हुए असहमति पत्र दाखिल किया था। बीते दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया था कि यह विधेयक संसद के मौजूदा सत्र में फिर से पेश किया जाएगा। बताया जा रहा है कि 655 पन्नों की रिपोर्ट जेपीसी द्वारा संसद के दोनों सदनों में सौंपी जा चुकी है। वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर मुस्लिम समुदाय में असंतोष है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह संशोधन वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण को लेकर अहम बदलाव लाएगा, जिससे समुदाय की धार्मिक और सामाजिक स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। विपक्षी दलों ने भी इसे अल्पसंख्यक विरोधी करार दिया है। हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि यह संशोधन पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधार के लिए जरूरी है।