समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन द्वारा राणा सांगा पर की गई टिप्पणी के बाद देशभर में विवाद गहरा गया है। करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। 21 मार्च को राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा के दौरान रामजी लाल सुमन ने कहा था कि, "राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर को भारत बुलाया था। हम बाबर की आलोचना करते हैं, लेकिन राणा सांगा की नहीं।" उन्होंने आगे कहा कि हिंदुस्तान के मुसलमान बाबर को अपना आदर्श नहीं मानते, बल्कि वे सूफी-संतों की परंपरा को मानते हैं। उनके इस बयान के बाद करणी सेना ने इसे राणा सांगा का अपमान बताया और विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए। सुमन की टिप्पणी से आक्रोशित करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने उनके आवास के बाहर प्रदर्शन किया और घर में घुसने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। करणी सेना के नेता महिपाल मकराना ने चेतावनी देते हुए कहा, "यह तो सिर्फ ट्रेलर है। ऐसे व्यक्तियों को मुंहतोड़ जवाब देना बहुत पहले ही चाहिए था। अगर रामजी लाल सुमन की राज्यसभा सदस्यता रद्द नहीं हुई, तो देशव्यापी विरोध होगा।" सांसद रामजी लाल सुमन ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने कहा, "मैंने सिर्फ ऐतिहासिक तथ्यों को बताया। मेरा बयान न किसी जाति, न किसी धर्म के खिलाफ था।" हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह अपने बयान पर कायम हैं और किसी भी स्थिति में माफी नहीं मांगेंगे। उन्होंने दो टूक कहा, "इस जन्म में तो माफी नहीं मांगूंगा। लोगों को सही इतिहास सुनने की आदत डालनी चाहिए।" रामजी लाल सुमन के बयान पर विवाद बढ़ता देख समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव उनके बचाव में उतर आए। उन्होंने कहा, "जब बीजेपी के नेता इतिहास में औरंगजेब की चर्चा कर सकते हैं, तो हमारे नेता भी इतिहास के पन्ने पलट सकते हैं।" इसके अलावा, जब करणी सेना के प्रदर्शनकारियों ने सांसद के घर पर हंगामा किया, तब भी अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, "भाजपा नफरत फैलाने के लिए इतिहास का इस्तेमाल करती है। रामजी लाल सुमन के आवास पर जो हुआ, वह निंदनीय है।" यह विवाद राजनीतिक रूप से तूल पकड़ चुका है। बीजेपी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जबकि समाजवादी पार्टी इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बता रही है। करणी सेना ने आंदोलन तेज करने की धमकी दी है, जिससे आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है।
म्यांमार में शुक्रवार सुबह 11:50 बजे, जब ज़मीन कांपी तो सिर्फ इमारतें नहीं गिरीं, बल्कि इंसानों की उम्मीदें भी मलबे में दफन हो गईं। 7.7 तीव्रता के भीषण भूकंप ने म्यांमार, थाईलैंड, भारत, बांग्लादेश और चीन तक को हिला दिया। बैंकॉक की गगनचुंबी इमारतें झूलने लगीं, म्यांमार की सड़कों में दरारें पड़ गईं, और इरावदी नदी पर बना एक विशाल पुल देखते ही देखते धराशायी हो गया। बैंकॉक की ऊंची इमारतों में लोग अपने ऑफिस में काम कर रहे थे, होटल में टूरिस्ट छुट्टियां मना रहे थे, और फिर… एक झटका, दूसरा झटका, और सब कुछ हिलने लगा! 30 मंजिला निर्माणाधीन इमारत पहले झुकी, फिर पूरी तरह गिर गई। मलबे में 81 लोग फंस गए, तीन की मौत की पुष्टि हो चुकी है। स्वीमिंग पूल का पानी लहरों में तब्दील हो गया, ऊंची इमारतों की छतों से कांच गिरने लगे। घबराए लोग सीढ़ियों से भागते हुए सड़कों पर आ गए। बैंकॉक के मध्य इलाके में जब दोपहर 1:30 बजे एक और झटका आया, तो इमारतों के अलार्म बज उठे, और तपती धूप में हजारों लोग खुले आसमान के नीचे खड़े रहे क्योंकि वापस जाने की हिम्मत किसी में नहीं थी। वहीँ म्यांमार में 20 लोगों की जान जा चुकी है, 300 से ज्यादा लोग घायल हैं। इरावदी नदी पर बना विशाल पुल टूटकर नदी में समा गया। भूकंप के 12 मिनट बाद आया 6.4 तीव्रता का आफ्टरशॉक, जिसने और ज्यादा तबाही मचा दी। कोलकाता, इंफाल, मेघालय और ईस्ट कार्गो हिल तक लोगों ने झटके महसूस किए। बांग्लादेश के ढाका, चटगांव में भी 7.3 तीव्रता के झटके आए, लोग घरों और दफ्तरों से बाहर भागे। सोशल मीडिया पर आई तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है एक इमारत के स्वीमिंग पूल का पानी सूनामी की तरह लहराने लगा। बैंकॉक की गलियों में धूल और मलबे के बादल उठने लगे। म्यांमार के अस्पतालों में घायलों की लंबी कतारें लगीं। सायरनों की आवाज़ों से पूरा शहर गूंज उठा। बचाव कार्य जारी, लेकिन डर अभी खत्म नहीं! बचाव दल ने अब तक 7 लोगों को जिंदा निकाला है, लेकिन दर्जनों अब भी मलबे में दबे हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों में और आफ्टरशॉक्स आ सकते हैं, जो और विनाशकारी हो सकते हैं। थाईलैंड की प्रधानमंत्री पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है। हर बार जब धरती हिलती है, तो यह सवाल उठता है क्या इंसान ने अपनी इमारतों को इतना मजबूत बनाया है कि वे कुदरत के इन थपेड़ों को सह सकें? या फिर हम बस इंतजार कर रहे हैं, अगली तबाही का…!