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Breaking News 26 March 2025

1.)  महादेव सट्टा घोटाले में CBI की छापेमारी 

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल के रायपुर और भिलाई स्थित आवासों पर आज सुबह सीबीआई ने छापेमारी की है। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई बहुचर्चित महादेव सट्टा घोटाले से जुड़ी हुई बताई जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री के अलावा चार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों एडिशनल एसपी अभिषेक माहेश्वरी, आईपीएस अभिषेक पल्लव, आईपीएस आरिफ शेख और आईपीएस आनंद छाबड़ा के ठिकानों पर भी सीबीआई की टीम अभी तुरंत पहुंची है। इसके अलावा, पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा और कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के निवासों पर भी सीबीआई की दबिश की खबर है। माना जा रहा है कि 20 हजार करोड़ रुपए के महादेव सट्टा घोटाले में कांग्रेस सरकार और अधिकारियों की कथित भूमिका की जांच के तहत यह कार्रवाई की गई है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर 500 करोड़ रुपए के लेन-देन का भी आरोप लग चुका है। इससे पहले, महादेव सट्टा किंग शुभम सोनी ने एक वीडियो जारी कर बघेल पर गंभीर आरोप लगाए थे। सीबीआई की कार्रवाई पर भूपेश बघेल ने अपने एक्स हैंडल से एक प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा कि "अब CBI आई है"। उनके कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि बघेल को 8 और 9 अप्रैल को अहमदाबाद में होने वाली AICC बैठक के लिए दिल्ली जाना था, लेकिन उससे पहले ही CBI उनके ठिकानों पर पहुंच गई। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को 'राजनीतिक बदले की कार्रवाई' करार दिया है। कांग्रेस के छत्तीसगढ़ संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, "बीजेपी की मोदी सरकार ने कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आवास पर सीबीआई को भेजा है।"

ED पहले ही कर चुकी है छापेमारी

गौरतलब है कि इससे पहले 10 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी महादेव सट्टा घोटाले के सिलसिले में दुर्ग जिले के 14 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल के आवासों की तलाशी ली गई थी। ईडी ने लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल के परिसरों की भी जांच की थी, जिन्हें चैतन्य बघेल का करीबी बताया जाता है। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप को लेकर देशभर में जांच चल रही है। इस घोटाले में फर्जी बैंक खातों और हवाला नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपए के लेन-देन का खुलासा हुआ था। आरोप है कि इस घोटाले के तार कई प्रभावशाली राजनीतिक और प्रशासनिक लोगों से जुड़े हुए हैं। अब सीबीआई की इस कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मच गई है। देखना होगा कि आगे इस मामले में और क्या खुलासे होते हैं।

 

2.) : AIMPLB के विरोध प्रदर्शन में लालू-तेजस्वी की हुंकार

वक्फ संशोधन बिल को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आह्वान पर पटना में हो रहे विरोध प्रदर्शन ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दी हैं। इस प्रदर्शन में RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत कई बड़े विपक्षी चेहरे शामिल हुए। इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन हो चुका है, लेकिन बिहार की चुनावी राजनीति को देखते हुए यह विरोध कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

मुस्लिम वोटबैंक पर कौन मारेगा बाजी?

बिहार में करीब 17.70% मुस्लिम आबादी है, जो राज्य की चुनावी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है। ऐतिहासिक रूप से मुस्लिम मतदाता राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ खड़ा रहा है। पूरे देश में जिस तरह मुसलमानों का झुकाव कांग्रेस की ओर बढ़ता दिख रहा है, बिहार में भी यह ट्रेंड जारी रह सकता है। यही कारण है कि लालू यादव की मौजूदगी इस विरोध प्रदर्शन में सिर्फ सांकेतिक नहीं, बल्कि राजनीतिक दांवपेच का एक अहम हिस्सा है।
तेजस्वी यादव ने मंच से गरजते हुए कहा, "यह बिल देश को तोड़ने और भाईचारा खत्म करने की साजिश है। कई दल इस बिल का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन आरजेडी हमेशा मुस्लिम समाज के साथ खड़ी रही है। हमें सत्ता की परवाह नहीं, संविधान और गंगा-जमुनी तहज़ीब बचाना पहली प्राथमिकता है।" नीतीश कुमार की 'सेक्युलर' छवि के चलते अब तक एक बड़ा मुस्लिम वोट बैंक जदयू के पक्ष में रहा है, लेकिन हाल ही में इफ्तार पार्टी के दौरान कुछ मुस्लिम संगठनों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन ने यह संकेत दे दिया है कि इस बार समीकरण बदल सकते हैं। AIMPLB के इस विरोध प्रदर्शन का असर जदयू के मुस्लिम वोट बैंक पर पड़ सकता है, जिससे राजद-कांग्रेस गठबंधन को सीधा फायदा होगा। इधर, लोजपा (रामविलास) और जीतन राम मांझी की 'हम' पार्टी भी सीमित मुस्लिम वोट बैंक पर अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन जिस तरह चिराग पासवान जैसे नेता इस मुद्दे पर 'हर स्थिति पर नज़र बनाए रखने' की भाषा अपना रहे हैं, उससे साफ है कि यह सियासी हलचल उन्हें भी बेचैन कर रही है। AIMPLB का यह विरोध प्रदर्शन सिर्फ एक धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि बिहार की सियासत में बड़ी हलचल का संकेत है। मुस्लिम मतदाता अगर पूरी तरह RJD-कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में एकजुट होता है, तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान नीतीश कुमार और उनके सहयोगियों को होगा। इस विरोध प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि वक्फ बिल अब सिर्फ एक कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने का एक बड़ा चुनावी मोर्चा बन चुका है।