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Breaking News 20 December 2025

1 ) Trump से लेकर Bill Gates तक 68 Private Photos VIRAL

अमेरिका की राजनीति और न्याय व्यवस्था एक बार फिर उस नाम के इर्द-गिर्द घूमने लगी है, जिसने सालों पहले पूरी दुनिया को झकझोर दिया था Jeffrey Epstein. सवाल वही पुराने हैं, लेकिन इस बार दायरा और बड़ा है कौन जानता था? कौन मिला था? और अब यह सब अचानक क्यों सामने आ रहा है? आइए जानते है … अमेरिकी Congressional Democrats ने हाल ही में जेफ्री एपस्टीन की एस्टेट से जुड़ी 68 नई तस्वीरें  सार्वजनिक की हैं। ये तस्वीरें अकेली नहीं हैं, बल्कि लगभग 95,000 images और documents के उस विशाल डेटाबेस का हिस्सा हैं, जो अमेरिका की House Oversight Committee के पास जमा हैं। यह रिलीज किसी मीडिया लीक का नतीजा नहीं, बल्कि एक आधिकारिक और राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे transparency यानी पारदर्शिता के नाम पर आगे बढ़ाया जा रहा है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका में Epstein Files Transparency Act जैसे कानूनों के जरिए Justice Department पर दबाव बढ़ाया जा रहा है कि वह एपस्टीन से जुड़े सभी unclassified records सार्वजनिक करे। डेमोक्रेट सांसदों का तर्क है कि जब मामला इतने बड़े स्तर का है, तो जनता को अधूरी नहीं, पूरी सच्चाई जानने का हक है। दूसरी ओर, आलोचक इसे political timing और selective disclosure बता रहे हैं। इन 68 तस्वीरों में कई चौंकाने वाले विज़ुअल्स शामिल हैं। कुछ तस्वीरों में high-profile public figures दिखाई देते हैं, जिनमें Bill Gates, Noam Chomsky, Steve Bannon जैसे नाम शामिल हैं। इससे पहले जारी की गई सामग्री में Donald Trump और अन्य प्रभावशाली हस्तियों का नाम भी सामने आ चुका है। हालांकि, यह बात बार-बार स्पष्ट की गई है कि तस्वीर में मौजूद होना किसी अपराध का प्रमाण नहीं है। यह केवल Epstein के social circle और access network को दिखाता है, न कि किसी व्यक्ति की criminal liability को।
इन फाइलों में केवल तस्वीरें ही नहीं, बल्कि text-message screenshots, payment references, foreign passports की copies और कुछ बेहद disturbing सामग्री भी शामिल है। कुछ तस्वीरों में ऐसे संकेत और संदर्भ मिले हैं जो Epstein के sexual exploitation network की मानसिकता और कार्यप्रणाली को उजागर करते हैं। खास तौर पर “Lolita” जैसे साहित्यिक संदर्भों का इस्तेमाल, investigators के अनुसार, एक psychological pattern की ओर इशारा करता है। Jeffrey Epstein खुद 2019 में sex trafficking of minors के आरोपों में गिरफ्तार हुआ था और बाद में जेल में उसकी मौत हो गई। आधिकारिक रूप से इसे suicide कहा गया, लेकिन उसकी मौत के बाद भी उसके नेटवर्क, संपर्क और फाइलें आज तक सवालों के घेरे में हैं। यही कारण है कि Epstein का मामला अब एक व्यक्ति तक सीमित न होकर एक systemic failure और elite accountability की बहस बन चुका है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू यही है कि यह रिलीज किसी अदालत के फैसले की तरह नहीं देखी जानी चाहिए। यह evidence disclosure है, न कि verdict। कानून विशेषज्ञों और जांच एजेंसियों का कहना है कि जब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ corroborated evidence और due process पूरा नहीं होता, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुँचना न सिर्फ गलत, बल्कि खतरनाक भी हो सकता है। कुल मिलाकर, Epstein से जुड़ी ये नई तस्वीरें एक बार फिर यह याद दिलाती हैं कि सत्ता, पैसा और पहुंच जब एक साथ आते हैं, तो जवाबदेही सबसे कमजोर कड़ी बन जाती है। यह मामला सिर्फ इस सवाल का नहीं है कि कौन तस्वीर में था, बल्कि इस बड़े सवाल का है कि क्या पूरी सच्चाई कभी सामने आ पाएगी, या फिर सच हमेशा फाइलों और समितियों के बीच दबा रहेगा? यही Epstein केस का असली मतलब है एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे सिस्टम की परतें, जिन पर से पर्दा उठना अभी बाकी है।

 

2 ) आखिर नीतीश कुमार की सिक्योरिटी क्यों बढ़ाई गई ? 

हिजाब विवाद के बाद CM Nitish Kumar को Extra Security क्यों ? क्या हुआ था उस दिन, और कौन-कौन माफी की मांग कर रहा है? क्या एक पल की असहज हरकत किसी मुख्यमंत्री की सुरक्षा बढ़ा सकती है? क्या यह मामला सिर्फ़ ‘gesture’ का है या ‘personal liberty’ और ‘religious freedom’ से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है? बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar इन दिनों एक ऐसे विवाद के केंद्र में हैं, जिसने राजनीति, समाज और सुरक्षा व्यवस्था तीनों को एक साथ झकझोर दिया है। Hijab / Naqab Controversy के बाद न सिर्फ़ सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश देखने को मिला, बल्कि अब स्थिति यहां तक पहुँच गई कि मुख्यमंत्री की extra security बढ़ा दी गई है। सवाल है ऐसा आखिर हुआ क्या? घटना का पूरा घटनाक्रम आखिर उस दिन मंच पर क्या हुआ?
यह मामला पटना में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम से जुड़ा है, जहाँ मुख्यमंत्री Nitish Kumar Ayush Doctors को appointment letters सौंप रहे थे। इसी दौरान एक मुस्लिम महिला डॉक्टर मंच पर आईं, जिनके चेहरे पर naqab / hijab था। वायरल हुए वीडियो में देखा गया कि मुख्यमंत्री ने महिला का चेहरा देखने के उद्देश्य से उसके नकाब को हटाने की कोशिश की।
हालाँकि, महिला ने तुरंत खुद को संभाला और स्थिति आगे नहीं बढ़ी, लेकिन कैमरों में कैद यह क्षण कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यहीं से विवाद की शुरुआत हुई।
विवाद क्यों भड़का? असल आपत्ति क्या है? आलोचकों का कहना है कि यह सिर्फ़ एक औपचारिक gesture नहीं था, बल्कि यह Consent, Dignity of a Woman, और Freedom of Religion से जुड़ा मामला है। किसी महिला के personal religious attire को बिना अनुमति हटाने की कोशिश,
सत्ता में बैठे व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक मंच पर ऐसा करना, और वह भी ऐसे समय में जब देश में पहले से Hijab Rights पर संवेदनशील बहस चल रही हो  इन तीनों वजहों से यह मामला symbolic controversy से निकलकर civil liberties issue बन गया।

तो आखिर Extra Security क्यों बढ़ाई गई?

विवाद के बाद मुख्यमंत्री Nitish Kumar को लेकर खुफिया एजेंसियों (Intelligence Inputs) ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक सोशल मीडिया पर धमकी भरे संदेश सामने आए, कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा हिंसक प्रतिक्रिया की आशंका जताई गई, और Law & Order की स्थिति बिगड़ने की संभावना को देखते हुए CM की सुरक्षा को tightened security protocol में डाल दिया गया। इसके बाद उनके कार्यक्रमों में restricted access, enhanced police deployment, और closer security ring लागू किया गया। यह साफ किया गया कि सुरक्षा बढ़ाना राजनीतिक दबाव नहीं बल्कि preventive measure है। 

तो किस-किस ने माफी की मांग की?

इस मुद्दे पर कई नामचीन हस्तियों ने खुलकर प्रतिक्रिया दी। Javed Akhtar ने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से पर्दा प्रथा के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन किसी महिला के हिजाब या नकाब को बिना उसकी सहमति छूना या हटाना पूरी तरह ग़लत है। उन्होंने मुख्यमंत्री से unconditional apology की मांग की। Zaira Wasim ने भी इसे महिला की गरिमा से जुड़ा मामला बताया और कहा कि Power किसी को boundaries cross करने का अधिकार नहीं देता। इसके अलावा कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिला अधिकार संगठनों और विपक्षी नेताओं ने भी माफी और जवाबदेही की मांग की। कुछ नेताओं ने मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए कहा कि यह सरकारी प्रक्रिया से जुड़ा मामला था, जहाँ पहचान के लिए चेहरा दिखाना ज़रूरी होता है। लेकिन इस तर्क को भी आलोचना का सामना करना पड़ा, क्योंकि सवाल प्रक्रिया का नहीं, तरीके का था। मुख्यमंत्री की सुरक्षा बढ़ी हुई है, सार्वजनिक माफी की मांग जारी है, और यह बहस अभी थमी नहीं है कि क्या सत्ता में बैठे लोगों को निजी धार्मिक सीमाओं को छूने का अधिकार है या नहीं ?