Latest News

Breaking News 19 January 2026

 मुंबई में पहली बार BJP का राज…

 मुंबई....देश की आर्थिक राजधानी। सपनों की नगरी और… एशिया की सबसे अमीर नगर निगम BMC। सवाल सीधा है, लेकिन जवाब सीधा नहीं। क्या भारतीय जनता पार्टी पहली बार मुंबई पर राज कर रही है? या फिर ये सिर्फ़ सत्ता का भ्रम है, जिसे हालिया राजनीतिक उथल-पुथल ने पैदा किया है? इस सवाल का जवाब पाने के लिए हमें सिर्फ़ आज नहीं, बल्कि मुंबई की राजनीति के पूरे इतिहास में झाँकना होगा। इतिहास बताता है मुंबई हमेशा एक पार्टी की नहीं रही, लेकिन एक धारा की ज़रूर रही...महाराष्ट्र बनने के बाद शुरुआती दशकों में मुंबई की नगर सत्ता पर कांग्रेस का प्रभाव रहा। उस दौर में नगर निगम राजनीति से ज़्यादा प्रशासन का केंद्र थी। लेकिन 1990 के दशक में जैसे ही मुंबई की सड़कों पर “मराठी मानुष” की आवाज़ गूंजी, राजनीति की दिशा बदल गई। यहीं से शुरू हुआ शिवसेना युग। 1997 के बाद से Brihanmumbai Municipal Corporation लगभग लगातार शिवसेना का क़िला बनी रही।
बीजेपी इस दौरान साथ थी, लेकिन हमेशा जूनियर पार्टनर के तौर पर। सत्ता का असली कंट्रोल मेयर, स्थायी समिति, फाइलों की दिशा सब शिवसेना के पास रहा। यानी साफ़ शब्दों में कहें तो BJP कभी भी मुंबई की मालिक नहीं रही, सिर्फ़ साझेदार रही। फिर आया 2017 जब पहली बार क़िले की दीवारें हिलीं 2017 का BMC चुनाव एक टर्निंग पॉइंट था। शिवसेना और Bharatiya Janata Party लगभग बराबरी पर आ गईं। सीटों का फासला मामूली था, लेकिन सत्ता फिर भी शिवसेना के पास ही रही। हालाँकि, यहीं से एक बात साफ़ हो गई BJP अब दरवाज़े तक आ चुकी है। तो अब “इस बार” ऐसा क्या हुआ जो इतिहास से बिल्कुल अलग है? यही वो मोड़ है जहाँ मुंबई की राजनीति ने करवट बदली। सबसे बड़ा झटका आया शिवसेना के टूटने से। एक तरफ़ उद्धव ठाकरे गुट, दूसरी तरफ़ एकनाथ शिंदे गुट। जिस पार्टी ने 25 साल तक मुंबई पर राज किया, वह पहली बार दो आवाज़ों में बँट गई। इस टूट का सीधा फायदा मिला बीजेपी को। अब बीजेपी सिर्फ़ सहयोगी नहीं रही वह राज्य की सत्ता में सीनियर प्लेयर बन चुकी है। संगठन, फंड, मशीनरी और प्रशासनिक पकड़ हर मोर्चे पर बढ़त। मुंबई का वोटर भी अब वही नहीं रहा। जहाँ पहले भावनात्मक मुद्दे भाषा, पहचान, अस्मिता हावी रहते थे, अब सवाल बदल चुके हैं जैसे सड़कें कैसी हैं? बारिश में शहर क्यों डूबता है? BMC का पैसा कहाँ जाता है? गवर्नेंस कौन देगा? युवा वोटर अब नारे नहीं, नतीजे चाहता है। हालांकि कांग्रेस कमजोर है। शिवसेना बंटी हुई है। और AIMIM जैसे दलों की मौजूदगी ने मुस्लिम वोटों में भी विभाजन किया है।
इस बिखराव का गणित सरल है  सीधा फायदा BJP को।  तो क्या BJP पहली बार मुंबई पर राज कर रही है? तकनीकी जवाब अब भी यही है इतिहास में BJP ने पहले कभी अकेले BMC नहीं चलाई। लेकिन राजनीतिक सच्चाई यह है कि इस बार हालात ऐसे हैं कि सत्ता की चाबी BJP के हाथ में दिख रही है। यही वजह है कि लोगों को लग रहा है  “ये पहली बार हो रहा है।”
तो इन अब के असली मायने क्या हैं?अगर BJP इस बार BMC पर पूरा कंट्रोल बनाती है, तो यह सिर्फ़ एक नगर निगम जीत नहीं होगी। यह होगा शिवसेना युग का अंत मुंबई की राजनीति का रीसेट और देश की सबसे अमीर नगर निगम पर नई विचारधारा का कब्ज़ा मुंबई में सवाल अब ये नहीं है कि “किसने पहले राज किया?” सवाल ये है कि क्या मुंबई अब अपनी राजनीति का सबसे बड़ा मोड़ देखने जा रही है? और शायद, इसका जवाब
आने वाला कल देगा।