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Breaking News 18 February 2025

 1 ) नेपाल की छात्रा की आत्महत्या के बाद हंगामा 

 

ओडिशा के कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT) में एक नेपाली छात्रा की संदिग्ध आत्महत्या के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आनन-फानन में सभी नेपाली छात्रों को हॉस्टल खाली करने का फरमान सुना दिया और उन्हें जबरन बसों में भरकर कटक रेलवे स्टेशन भेज दिया गया। यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ चुका है, क्योंकि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस पर संज्ञान लिया है।

क्या है पूरा मामला?

नेपाल की रहने वाली प्रकृति लामसाल, जो कि केआईआईटी की बीटेक तृतीय वर्ष की छात्रा थीं, शनिवार को अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाई गईं। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की बात सामने आ रही है। पुलिस के अनुसार, छात्रा एक सहपाठी से प्रेम करती थीं और संभवतः उसे ब्लैकमेल किया जा रहा था। मामले में एक छात्र के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया गया है और पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। छात्रा की मौत के बाद यूनिवर्सिटी परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। नेपाली छात्रों ने न्याय की मांग करते हुए पूरी रात धरना दिया। लेकिन रविवार सुबह उन्हें हॉस्टल खाली करने का आदेश जारी कर दिया गया। छात्रों का आरोप है कि उनके पास न तो जाने का कोई ठिकाना था, न ही पर्याप्त पैसे। कई छात्रों के पास टिकट तक नहीं थे और उन्हें जबरन कटक रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया गया। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस पूरे मामले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि हमारे संज्ञान में आया है कि ओडिशा के केआईआईटी विश्वविद्यालय में एक नेपाली छात्रा की संदिग्ध मौत हुई है और नेपाली छात्रों को जबरन हॉस्टल से निकाला गया है। सरकार इस मामले पर कूटनीतिक स्तर पर काम कर रही है और संबंधित भारतीय अधिकारियों के संपर्क में है। नेपाल दूतावास की एक टीम को भुवनेश्वर भेजा गया है, जो छात्रों की काउंसलिंग करेगी और उनके लिए रहने-खाने की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। वहीँ भुवनेश्वर के डीसीपी पिनाक मिश्रा के अनुसार छात्रा के कमरे को सील कर दिया गया है और शव को उसके माता-पिता के आने तक शवगृह में रखा गया है। आरोपी छात्र हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है। छात्रों से अपील की गई है कि वे कानून अपने हाथ में न लें और शांति बनाए रखें। इस पूरे मामले में केआईआईटी प्रशासन की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। सवाल यह है कि  आखिर बिना किसी आधिकारिक जांच के ही नेपाली छात्रों को क्यों निकाला गया। छात्रा की मौत की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई गई।  मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केआईआईटी प्रशासन ने नेपाल के सभी अंतरराष्ट्रीय छात्रों को 17 फरवरी तक कैंपस छोड़ने का निर्देश दिया था। इस आदेश के बाद रविवार रात नेपाली छात्रों को हॉस्टल से निकालकर बसों में भरकर करीब 30 किलोमीटर दूर कटक रेलवे स्टेशन पहुंचा दिया गया। रेलवे स्टेशन पर पहुंचे छात्रों ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि "हमें जबरन निकाल दिया गया, हमारे पास पैसे नहीं हैं, हमें खाना भी नहीं मिला। 28 फरवरी को हमारी परीक्षा थी, लेकिन अब हमें बिना किसी पूर्व सूचना के निकाल दिया गया। हॉस्टल में स्टाफ घुस आया, हमें निकलने के लिए मजबूर किया और जो जल्दी नहीं निकले उन्हें मारा भी गया। वहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि नेपाली छात्रों को उनके सुरक्षा कारणों से घर भेजा जा रहा है। पुलिस ने भी हालात को देखते हुए दो टुकड़ियां (करीब 60 जवान) यूनिवर्सिटी परिसर में तैनात कर दी हैं।