सोमवार की सुबह अभी पूरी तरह हुई भी नहीं थी। घड़ी में करीब 3 बज रहे थे। ओडिशा के कटक का SCB मेडिकल कॉलेज और अस्पताल आम दिनों की तरह शांत था। ICU में मशीनों की धीमी आवाजें थीं, मॉनिटर पर धड़कनों की लकीरें चल रही थीं और डॉक्टर-नर्स रात की ड्यूटी में मरीजों की निगरानी कर रहे थे। लेकिन अचानक एक ऐसी घटना हुई जिसने कुछ ही मिनटों में अस्पताल के उस हिस्से को खौफ और अफरातफरी के मंजर में बदल दिया। मेडिसिन विभाग की इमारत में बने ट्रॉमा केयर ICU की पहली मंजिल पर अचानक आग भड़क उठी। पहले हल्का धुआं दिखाई दिया, लेकिन देखते-देखते वह इतना घना हो गया कि पूरे वार्ड में फैल गया। ICU जैसे संवेदनशील इलाके में आग का मतलब होता है हर सेकंड जिंदगी और मौत के बीच की दूरी कम होना। उस समय ICU में कई मरीज ऐसे थे जो लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर जिंदगी की आखिरी उम्मीद से जुड़े हुए थे। लेकिन आग की लपटों और जहरीले धुएं ने हालात को कुछ ही मिनटों में बेकाबू बना दिया। वार्ड के अंदर चीख-पुकार और अफरातफरी मच गई। डॉक्टर, नर्स और अस्पताल के कर्मचारी तुरंत हरकत में आए। मरीजों को किसी तरह बाहर निकालने की कोशिश शुरू हुई। इसी बीच दमकल विभाग को सूचना दी गई और कुछ ही देर में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां अस्पताल पहुंच गईं। लेकिन तब तक ICU के अंदर का दृश्य बेहद भयावह हो चुका था। कई मरीज धुएं की वजह से बेहोश हो गए थे। कुछ ऐसे थे जो खुद हिल-डुल भी नहीं सकते थे। ऐसे में उन्हें बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो रहा था। फायर ब्रिगेड और अस्पताल स्टाफ ने मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। एक-एक करके मरीजों को बाहर निकाला जाने लगा। कई मरीजों को स्ट्रेचर पर लादकर, तो कई को उठाकर बाहर लाया गया। जो मरीज बचा लिए गए, उनमें से कई की हालत बेहद गंभीर थी। उन्हें तुरंत अस्पताल के ‘न्यू मेडिसिन ICU’ में शिफ्ट कर दिया गया ताकि इलाज जारी रखा जा सके। आग बुझाने के लिए दमकल की तीन गाड़ियों को लगाया गया। घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। लेकिन तब तक यह हादसा कई परिवारों के लिए अपूरणीय त्रासदी बन चुका था। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी खुद अस्पताल पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि हादसे के वक्त उस वार्ड में कुल 23 मरीज भर्ती थे। बचाव अभियान शुरू होने से पहले ही 7 मरीजों की मौत हो चुकी थी। इसके बाद जब मरीजों को बाहर निकालकर इलाज शुरू किया गया तो 3 और मरीजों ने दम तोड़ दिया। इस तरह इस दर्दनाक हादसे में कुल 10 मरीजों की जान चली गई। इसके अलावा कम से कम 5 मरीज गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं और अस्पताल के दो कर्मचारी भी गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घटना की खबर मिलते ही अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। कुछ ही देर में प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। मुख्यमंत्री मोहन माझी के साथ-साथ स्वास्थ्य सचिव, कटक जिला कलेक्टर और डीसीपी भी घटनास्थल पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य की निगरानी की। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और इस दुखद घटना पर गहरा शोक जताया।सरकार ने इस हादसे के बाद मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मोहन माझी ने कहा कि हर मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर दुख जताया है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया गया है। दुखद बात यह है कि यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब ओडिशा पहले से ही प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। इस घटना से ठीक एक दिन पहले राज्य के मयूरभंज जिले में आए भीषण तूफान ने तबाही मचा दी थी। अधिकारियों के मुताबिक इस तूफान में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 लोग घायल हो गए। तूफान की तेज रफ्तार हवाओं और बवंडर जैसी स्थिति ने 200 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचाया, बताया गया कि दोपहर करीब 4 बजे राष्ट्रीय राजमार्ग NH-220 पर इस तूफान की वजह से दो लोगों की जान चली गई। वहीं पांच घायलों को क्योंझर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। कटक के इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर देश के अस्पतालों में फायर सेफ्टी और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां मरीज इलाज के भरोसे आते हैं, अगर वही जगह अचानक आग और धुएं के जाल में बदल जाए, तो यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि सिस्टम की बड़ी चूक भी बन जाती है। अब देखना होगा कि इस मामले की जांच में क्या सामने आता है क्या यह तकनीकी खराबी थी, लापरवाही थी, या सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी कमी? लेकिन फिलहाल सच यही है कि कटक के इस अस्पताल में लगी आग ने 10 परिवारों से उनके अपने छीन लिए।