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Breaking News 16 January 2026

1 )  कौन बनेगा BJP का अगला अध्यक्ष?

भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तारीख़ों का ऐलान कर दिया है। 19 जनवरी को नामांकन और 20 जनवरी को घोषणा। यह BJP के भीतर अगले पाँच साल की राजनीति, रणनीति और सत्ता-संतुलन तय करने वाला फैसला है। यह चुनाव किसी आम लोकतांत्रिक मुकाबले जैसा नहीं होता। यहां पोस्टर नहीं लगते, रैलियां नहीं होतीं और वोटिंग भी औपचारिकता भर रहती है। BJP में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन सहमति, संकेत और संतुलन से होता है और यही इसे दिलचस्प बनाता है। BJP के संगठनात्मक ढांचे में राष्ट्रीय अध्यक्ष सिर्फ़ एक पद नहीं, बल्कि पार्टी मशीनरी का ऑपरेटिंग सिस्टम होता है। वही तय करता है कि कौन सा राज्य प्राथमिकता में रहेगा, किस नेता को उभारा जाएगा और किसे साइडलाइन किया जाएगा। यही कारण है कि नामांकन की तारीख़ आने से पहले ही असली लड़ाई कमरों के भीतर शुरू हो चुकी है जहां RSS, संसदीय बोर्ड और शीर्ष नेतृत्व के बीच संतुलन साधा जाता है। वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 2020 से इस पद पर हैं।।उनके कार्यकाल में BJP ने 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा, सरकार बनाई और संगठनात्मक स्तर पर एक स्थिरता बनाए रखी। लेकिन 2024 के बाद पार्टी के भीतर यह स्पष्ट हो गया कि अब संगठन को नए टेम्पलेट और नई ऊर्जा की ज़रूरत है खासतौर पर 2029 की तैयारी के लिए।

तो कौन बन सकता है अगला अध्यक्ष?

सबसे मजबूत नाम है भूपेंद्र यादव इस पूरी प्रक्रिया में जो नाम सबसे ज़्यादा गंभीरता से लिया जा रहा है, वह है भूपेंद्र यादव। संगठन और सरकार दोनों का अनुभव, चुनावी रणनीति की समझ और शीर्ष नेतृत्व का भरोसा उन्हें सबसे आगे खड़ा करता है। भूपेंद्र यादव न तो ज़मीनी जननेता की छवि रखते हैं और न ही मीडिया में आक्रामक बयानबाज़ी करते हैं। लेकिन BJP की राजनीति में यही उनकी ताक़त है कम बोलना, ज़्यादा कंट्रोल। RSS से सहज रिश्ते और अमित शाह की रणनीतिक टीम का हिस्सा होना उन्हें सबसे सुरक्षित विकल्प बनाता है। इसके बाद है  धर्मेंद्र प्रधान वे पहले संगठन में राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं और मोदी सरकार के पुराने भरोसेमंद चेहरों में गिने जाते हैं। उनकी राजनीतिक शैली अपेक्षाकृत आक्रामक है और युवाओं में पकड़ भी है। हालांकि, कुछ राज्यों में चुनावी प्रयोगों की सीमित सफलता और RSS लॉबी में अपेक्षाकृत कम प्रभाव उनके रास्ते की सबसे बड़ी बाधा मानी जा रही है। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान: लोकप्रिय लेकिन ‘बहुत बड़े’ शिवराज सिंह चौहान का नाम आते ही जनस्वीकृति और अनुभव की तस्वीर सामने आती है। लंबे समय तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज एक करिश्माई नेता हैं, लेकिन BJP की संगठनात्मक राजनीति में यही उनकी सबसे बड़ी चुनौती है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए पार्टी को ऐसा चेहरा चाहिए जो संगठन को संभाले न कि संगठन से बड़ा हो जाए। इसी वजह से शिवराज का नाम चर्चा में रहते हुए भी निर्णायक सूची में थोड़ा पीछे माना जा रहा है। इसके बाद है मनोहर लाल खट्टर RSS की पसंद, जनमानस की दूरी मनोहर लाल खट्टर का नाम भी समीकरणों में है। RSS पृष्ठभूमि, अनुशासन और संगठनात्मक सोच उनके पक्ष में जाती है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान और राजनीतिक आक्रामकता सीमित है। वे अध्यक्ष से ज़्यादा संगठनात्मक सलाहकार की भूमिका में बेहतर फिट माने जाते हैं इस पूरी कवायद में बी एल संतोष जैसे चेहरे भी अहम हैं जो सामने नहीं दिखते, लेकिन फैसलों की दिशा तय करते हैं। BJP में अक्सर यही लोग “किंगमेकर” बनते हैं, न कि “किंग”।  RSS का झुकाव ऐसे अध्यक्ष की ओर होता है जो वैचारिक रूप से संतुलित हो संगठन पर नियंत्रण रख सके और सत्ता के केंद्र से टकराव न करे
यही कारण है कि यह चुनाव कम और परीक्षा ज़्यादा है। BJP इस बार किसी बड़े जननायक की तलाश में नहीं है। उसे चाहिए एक ऐसा अध्यक्ष जो 2029 की ज़मीन तैयार करे, राज्यों में संगठन को धार दे और केंद्र की सत्ता के साथ तालमेल बनाए।