सोमवार की सुबह उत्तर प्रदेश की न्याय व्यवस्था के लिए एक सामान्य दिन की तरह शुरू हुई थी, लेकिन कुछ ही मिनटों में माहौल बदल गया। राजधानी लखनऊ से लेकर अयोध्या, वाराणसी, मेरठ, अलीगढ़, आजमगढ़, अमरोहा समेत कुल 18 जिलों की कचहरियों को एक साथ ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली। मेल में साफ शब्दों में दो समय लिखे गए थे पहला 11:15 बजे और दूसरा 12:15 बजे और दावा किया गया था कि अदालत परिसरों में विस्फोटक, यहां तक कि कुछ जगह RDX, लगाया गया है। जैसे ही यह सूचना प्रशासन तक पहुँची, कोर्ट परिसरों में हड़कंप मच गया। वकीलों की भीड़ बाहर निकलती दिखी, पेशी पर आए लोग घबराए हुए सड़कों पर जमा हो गए, और तत्काल प्रभाव से कई जगहों पर अदालत की कार्यवाही रोक दी गई। स्थानीय पुलिस, बम निरोधक दस्ता BDS, डॉग स्क्वायड, स्पेशल टास्क फोर्स STF और एंटी टेरर स्क्वायड ATS ने मोर्चा संभाल लिया। कोर्ट परिसरों को खाली कराया गया, हर कमरे, हर चेंबर और हर संदिग्ध कोने की सघन तलाशी ली गई। हालांकि तय समय गुजर जाने के बाद भी किसी भी जिले में कोई विस्फोट नहीं हुआ और अब तक किसी संदिग्ध वस्तु की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन डर का असर पूरे सिस्टम पर साफ दिखाई दिया। गौरतलब है कि यह कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले भी इसी तरह के धमकी भरे ई-मेल सामने आ चुके हैं, जिनके तार कथित तौर पर दक्षिण भारत और महाराष्ट्र से जुड़े होने की आशंका जताई गई थी। अब जांच एजेंसियां इन मेल्स के आईपी एड्रेस, सर्वर लोकेशन और संभावित वीपीएन या डार्क वेब कनेक्शन की पड़ताल कर रही हैं। बड़ा सवाल यही है कि अगर यह महज फर्जी धमकी है, तो फिर एक साथ 18 जिलों को निशाना बनाने का मकसद क्या है? क्या यह सिर्फ दहशत फैलाने की कोशिश है, या न्याय व्यवस्था को मानसिक रूप से अस्थिर करने की कोई सुनियोजित साजिश? फिलहाल आधिकारिक तौर पर किसी विस्फोट या बरामदगी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से राज्य की अदालतों को एक साथ निशाना बनाया गया, उसने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है और यह साफ कर दिया है कि अब खतरा सिर्फ सड़कों या बाजारों तक सीमित नहीं, बल्कि न्याय के मंदिर भी साइबर धमकियों के निशाने पर है
कर्नाटक के हम्पी के पास स्थित सनापुर झील के किनारे 6 मार्च 2025 की रात घटी घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस रात दो महिलाएँ, जिनमें एक 27 वर्षीय इजरायली पर्यटक और दूसरी 29 वर्षीय स्थानीय होमस्टे संचालक थीं, अपने तीन पुरुष साथियों के साथ झील के पास बैठी थीं और तारों को देख रही थीं। इसी दौरान तीन स्थानीय युवक मोटरसाइकिल पर वहाँ पहुँचे और पहले पेट्रोल और पैसे की माँग की। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने समूह पर हमला कर दिया। तीनों पुरुषों को बुरी तरह पीटा गया और 26 वर्षीय ओडिशा निवासी टूर गाइड बिबाश नायक को तुंगभद्रा नहर में धक्का दे दिया गया, जिससे उसकी डूबने से मौत हो गई। इसके बाद दोनों महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। आरोपियों ने लगभग 9,500 रुपये नकद और दो मोबाइल फोन भी लूट लिए। घटना के बाद कर्नाटक पुलिस ने विशेष जांच शुरू की और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और पीड़ितों के बयानों के आधार पर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों के नाम मल्लेश उर्फ हंडिमल्ला लगभग 22 वर्ष... साई उर्फ चेतन साईराम लगभग 21 वर्ष और शरणप्पा लगभग 30 वर्ष के बताए गए। मामले की सुनवाई कोप्पल जिले की गंगावती स्थित प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में चली। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शी बयान और तकनीकी सबूतों को पर्याप्त मानते हुए 6 फरवरी 2026 को तीनों आरोपियों को हत्या, सामूहिक बलात्कार, बलात्कार, हत्या के प्रयास और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया। इसके बाद 16 फरवरी 2026 को अदालत ने इस मामले को “दुर्लभ से भी दुर्लभ” श्रेणी का अपराध मानते हुए तीनों दोषियों को मृत्यु दंड की सजा सुनाई। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि यह अपराध न केवल पीड़ितों के खिलाफ बल्कि समाज और मानवता के खिलाफ भी जघन्य हमला है। हालांकि भारतीय कानून के अनुसार दोषियों को उच्च न्यायालय और उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार प्राप्त है, इसलिए अंतिम कानूनी स्थिति अपील प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय मानी जाएगी। हम्पी, जो विश्व धरोहर स्थल के रूप में जाना जाता है, वहाँ हुई इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता पैदा की। अदालत के फैसले ने कड़ा संदेश देने की कोशिश की है कि ऐसे जघन्य अपराधों के प्रति कानून सख्त रुख अपनाएगा, हालांकि न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में क्या होगा इसको जानने के लिए जुड़े रहे ग्रेट पोस्ट न्यूज से