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Breaking News 15 February 2025

1 ) शेयर बाजार में लगातार आठवें दिन गिरावट 

भारतीय शेयर बाजार हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भी दबाव में नजर आया। शुरुआती बढ़त गंवाकर सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद हुए। शुक्रवार को BSE सेंसेक्स 199.76 अंक (0.26%) गिरकर 75,939.21 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 102.16 अंक (0.44%) फिसलकर 22,929.25 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 699.33 अंक (0.91%) तक लुढ़ककर 75,439.64 के स्तर तक पहुंच गया था। शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली को माना जा रहा है। निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है, जिससे बाजार में गिरावट का सिलसिला बना हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, FII ने गुरुवार को 2,789.91 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची। लगातार आठ कारोबारी सत्रों में भारतीय बाजार को तगड़ा झटका लगा है। बीएसई बेंचमार्क सेंसेक्स 2,644.6 अंक (3.36%) तक गिर चुका है, जबकि निफ्टी में 810 अंक (3.41%) की गिरावट आई है।

किन शेयरों में गिरावट और कहां मिला फायदा?

गिरावट वाले प्रमुख स्टॉक्स: अडानी पोर्ट्स (4% गिरावट), अल्ट्राटेक सीमेंट, सन फार्मा, इंडसइंड बैंक, एनटीपीसी और टाटा स्टील। बढ़त वाले स्टॉक्स: नेस्ले, आईसीआईसीआई बैंक, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और HCL टेक। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यम और लघु कंपनियों की कॉर्पोरेट आय बाजार की उम्मीदों से कमजोर रही है, जिससे निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति दिख रही है। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर के मुताबिक, "रुपये में गिरावट, कॉर्पोरेट आय में नरमी और व्यापारिक टैरिफ जैसे बाहरी कारकों के कारण एफआईआई की निकासी बढ़ सकती है। जब तक इन मुद्दों पर स्पष्टता नहीं आती और कंपनियों की आय में सुधार नहीं दिखता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।"

वैश्विक बाजारों का असर

एशियाई बाजार में सियोल, शंघाई और हांगकांग के बाजार में तेजी दिखी, जबकि टोक्यो में गिरावट रही। यूरोपीय बाजार में शुरुआती कारोबार में मिला-जुला रुख देखने को मिला। अमेरिकी बाजार में गुरुवार को अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच द्विपक्षीय व्यापार को लेकर बातचीत हुई। दोनों देशों ने 2030 तक व्यापार को दोगुना कर 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का संकल्प लिया है। इसके तहत टैरिफ कम करने और बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए समझौते पर चर्चा शुरू हुई है। संयुक्त बयान में मोदी और ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा, निष्पक्ष व्यापार और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देने की बात कही। इससे आने वाले समय में भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में नए अवसर मिल सकते हैं।

डॉलर के मुकाबले रुपया 12 पैसे मजबूत

विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार को रुपया 12 पैसे मजबूत होकर 86.81 (अनंतिम) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और FII की बिकवाली से रुपये की तेजी सीमित रही। रुपये की इंट्राडे स्थिति  उच्चतम स्तर 86.79 और न्यूनतम स्तर 86.90 है। गुरुवार को 2 पैसे की मामूली बढ़त के साथ 86.93 पर बंद हुआ था। बुधवार को 16 पैसे की गिरावट, जबकि मंगलवार को 66 पैसे की बड़ी बढ़त दर्ज की गई थी। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी के कारण रुपये में मजबूती आई है, लेकिन एफआईआई की बिकवाली और तेल की कीमतें रुपये पर दबाव बना सकती हैं।

 

2 ) जम्मू-कश्मीर में बहाली की नई इबारत 

 

कभी संघर्ष और अशांति के लिए पहचाने जाने वाले जम्मू-कश्मीर की तस्वीर अब बदल रही है। श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय (SMVDU) के 10वें दीक्षांत समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जम्मू-कश्मीर में हो रहे ऐतिहासिक परिवर्तनों पर महत्वपूर्ण बयान दिए। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र अब संघर्ष की नहीं, बल्कि विश्वास, प्रगति और राष्ट्रवाद की नई इबारत लिख रहा है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र अब संघर्ष की नहीं, बल्कि विश्वास और आस्था की बहाली की कहानी बन चुका है। उपराष्ट्रपति ने 2024 के लोकसभा चुनावों में जम्मू-कश्मीर में 35 वर्षों में सबसे अधिक मतदान का जिक्र करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने वाला संकेत है। "अब यह क्षेत्र संघर्ष की कहानी नहीं रह गया, बल्कि हर निवेश प्रस्ताव पुनर्स्थापित विश्वास और प्रगति का प्रतीक बन चुका है," उन्होंने कहा। धनखड़ ने 2019 में अनुच्छेद 370 के हटने को "पीढ़ियों की आकांक्षाओं को पंख देने" जैसा बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक अस्थायी प्रावधान था, जिसे डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने तैयार करने से इनकार कर दिया था। "सरदार पटेल जिन्होंने रियासतों का भारतीय संघ में एकीकरण किया, वे भी जम्मू-कश्मीर को पूरी तरह शामिल नहीं कर सके थे, लेकिन 2019 में यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया," उन्होंने कहा।

आर्थिक बदलाव: निवेश और पर्यटन में उछाल

उपराष्ट्रपति ने बताया कि पिछले दो वर्षों में जम्मू-कश्मीर को 65,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिससे क्षेत्र में आर्थिक विश्वास बढ़ा है। 2019 के बाद पहली बार विदेशी निवेश (एफडीआई) यहां आया है, और कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां निवेश के लिए उत्सुक हैं। पर्यटन में भी रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई। 2023 में 2 करोड़ से अधिक पर्यटकों ने जम्मू-कश्मीर की यात्रा की, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिला। धनखड़ ने युवाओं से राष्ट्रवाद को अपनी पहचान बनाने की अपील की। उन्होंने कहा, "राष्ट्रहित से बड़ा कोई राजनीतिक या व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं हो सकता।" उन्होंने नागरिक कर्तव्यों के पालन पर जोर दिया और इसे देश की प्रगति का मूल मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का यह बदलाव केवल एक क्षेत्रीय परिवर्तन नहीं, बल्कि यह भारत के राष्ट्रीय पुनर्जागरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने आह्वान किया, "आइए, हम जम्मू-कश्मीर और भारत के लिए एक नई सुबह के निर्माता बनें।"
इस दीक्षांत समारोह में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, शिक्षा मंत्री सकीना फिरदौस और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति धनखड़ को पिछले साल 27 दिसंबर को विश्वविद्यालय आना था, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के कारण उनकी यात्रा पुनर्निर्धारित करनी पड़ी। इस बार उनके कटरा पहुंचने पर जम्मू हवाई अड्डे पर उपराज्यपाल सिन्हा और उमर अब्दुल्ला ने उनकी अगवानी की।