मिडिल ईस्ट में भड़कती भू-राजनीतिक आग का धुआं अब भारत के शेयर बाजार तक पहुंच गया है। शुक्रवार को बाजार खुलते ही निवेशकों के चेहरों पर चिंता साफ दिखी और कुछ ही घंटों में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों फिसलकर लाल निशान में चले गए। दोपहर करीब 12 बजे तक सेंसेक्स करीब 800 अंकों की गिरावट के साथ 75 हजार के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी भी 250 अंकों से ज्यादा टूटकर 23,300 के करीब पहुंच गया। असल डर सिर्फ शेयर बाजार का नहीं है, बल्कि उस समुद्री रास्ते का है जिसे दुनिया की तेल लाइफलाइन कहा जाता है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने साफ शब्दों में कहा कि दुश्मन ताकतों पर दबाव बनाने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किया जाना चाहिए। यही वह रास्ता है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है। यानी अगर यहां रुकावट आई तो उसका असर सीधे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
इस बयान के बाद, एशिया-पैसिफिक के कई बाजारों में भी कमजोरी देखी गई और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। बाजार में सबसे ज्यादा मार मेटल और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर पड़ी। हिंडालको, टाटा स्टील, लार्सन एंड टुब्रो और टाटा मोटर्स जैसे बड़े शेयर गिरावट के टॉप लिस्ट में रहे। सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी मेटल 4 फीसदी से ज्यादा टूट गया, जबकि ऑटो और PSU बैंक सेक्टर भी दबाव में नजर आए। हालांकि FMCG सेक्टर ने गिरते बाजार में थोड़ी मजबूती दिखाकर राहत जरूर दी। दोपहर तक तस्वीर और ज्यादा खराब दिखी। इसी बीच सरकार को एक और मोर्चे पर लोगों को समझाना पड़ा। मिडिल ईस्ट तनाव के कारण LPG सप्लाई को लेकर अफवाहें फैलने लगीं और कई जगह लोगों ने घबराकर सिलेंडर बुकिंग शुरू कर दी। इस पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ कहा कि LPG की कोई कमी नहीं है और लोगों से घबराहट में बुकिंग न करने की अपील की गई है। सरकार के मुताबिक LPG उत्पादन में करीब 28% की बढ़ोतरी की गई है ताकि सप्लाई में कोई दिक्कत न आए। साथ ही जरूरत पड़ने पर कुछ कमर्शियल LPG सिलेंडरों को भी घरेलू उपयोग के लिए जारी करने की तैयारी की जा रही है। इतना ही नहीं, राज्यों को अतिरिक्त 48,000 किलोलीटर मिट्टी का तेल भी भेजा जा रहा है ताकि ऊर्जा आपूर्ति पर किसी तरह का दबाव न बने। यानी फिलहाल तस्वीर साफ है मिडिल ईस्ट की जंग सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है। उसका असर शेयर बाजार, तेल की कीमतों और आम लोगों की रसोई तक महसूस किया जा रहा है।
मिडिल ईस्ट की जंग अब मिसाइलों और धमाकों से कहीं आगे जा चुकी है अब इसके बीच एक ऐसा दावा सामने आया है जिसने ईरान की सत्ता को लेकर नई सनसनी पैदा कर दी है। ब्रिटिश अखबार द सन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उनकी हालत इतनी खराब है कि वे कोमा में हैं और उनका एक पैर भी काटना पड़ा है। ये दावा उस समय सामने आया है जब कुछ ही घंटे पहले मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश जारी हुआ था। उस संदेश में कहा गया था कि खाड़ी क्षेत्र में हमले जारी रहेंगे और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी भी बरकरार रहेगी। लेकिन इस संदेश के सामने आने के बाद ही सवाल खड़ा हो गया, अगर मोजतबा खामेनेई इतने आक्रामक संदेश दे रहे हैं, तो वे खुद सामने क्यों नहीं आए? अस्पताल के भीतर क्या हो रहा है? ‘द सन’ की रिपोर्ट अपने सूत्रों के हवाले से दावा करती है कि मोजतबा खामेनेई इस समय तेहरान की सिना यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती हैं। बताया गया है कि अस्पताल की जिस बिल्डिंग में उन्हें रखा गया है, उसके एक हिस्से को भारी सुरक्षा के बीच पूरी तरह सील कर दिया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री मोहम्मद रज़ा ज़फरगंदी खुद उनकी निगरानी कर रहे हैं। ज़फरगंदी को ईरान के सबसे अनुभवी सर्जनों में गिना जाता है। तो चोट कितनी गंभीर है? रिपोर्ट के मुताबिक मोजतबा खामेनेई को कई गंभीर चोटें आई हैं। दावा है कि उनका एक पैर काटना पड़ा, जबकि पेट और लिवर में भी गहरी चोटें आई हैं। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि उन्हें ये चोटें उसी हमले में लगी थीं या नहीं, जिसमें 28 फरवरी को आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हुई थी। 28 फरवरी से जब से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष तेज हुआ है, तब से मोजतबा खामेनेई एक बार भी सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। उन्हें 8 मार्च को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया, यानी अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के करीब एक हफ्ते बाद। उस दिन ईरानी मीडिया ने कहा था कि मोजतबा जल्द ही देश को संबोधित करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पांच दिन बाद उनका पहला संदेश जरूर आया, मगर वह भी टीवी एंकर ने पढ़कर सुनाया। मोजतबा खुद कैमरे पर नहीं दिखे। ईरान के सरकारी टीवी एंकर उन्हें “रमजान का जांबाज” यानी घायल योद्धा बता रहे हैं। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि मोजतबा खामेनेई कब और कैसे घायल हुए। यही वजह है कि अब दुनिया भर में सवाल उठ रहे हैं क्या ईरान का नया सुप्रीम लीडर सच में गंभीर हालत में है? या फिर यह सब जंग के बीच फैल रही अफवाहों का हिस्सा है? सच्चाई क्या है, इसका साफ जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।