जब किसी रैली में लोग मरते हैं, तो क्या मामला वहीं खत्म हो जाता है या फिर यह पूछा जाना चाहिए कि भीड़ क्यों बेकाबू हुई, इंतज़ाम क्यों फेल हुए और जिनके नाम पर लोग जमा हुए, उनकी ज़िम्मेदारी कहाँ तय होगी? करूर भगदड़ केस आज इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूम रहा है, और इसी वजह से तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और TVK प्रमुख विजय को दिल्ली में CBI के दफ्तर तक आना पड़ा। सितंबर 2025 का वो दिन तमिलनाडु के करूर में आज भी लोगों के ज़हन में डर की तरह दर्ज है। विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कज़गम की रैली थी, भीड़ उम्मीद से कहीं ज़्यादा थी और इंतज़ाम उतने ही कम। लोग आगे बढ़ना चाहते थे, कोई पीछे हटने को तैयार नहीं था। कुछ ही मिनटों में हालात हाथ से निकल गए धक्का-मुक्की, चीख-पुकार और फिर भगदड़। कई ज़िंदगियाँ वहीं खत्म हो गईं, कई परिवार हमेशा के लिए टूट गए।
शुरुआत में मामला स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार की जांच तक सीमित रहा, लेकिन जैसे-जैसे मौतों का आंकड़ा और सवाल बढ़ते गए, वैसे-वैसे यह केस भी बड़ा होता चला गया। पीड़ित परिवारों ने पूछा अगर रैली की इजाज़त मिली थी, तो सुरक्षा पूरी क्यों नहीं थी? अगर भीड़ ज़्यादा थी, तो कार्यक्रम रोका क्यों नहीं गया? और सबसे अहम सवाल क्या सिर्फ़ छोटे अफसरों पर कार्रवाई काफी है? इन्हीं सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंप दी। इसके बाद जांच का दायरा बदला। अब सिर्फ़ क्या हुआ नहीं, बल्कि किसके फैसले से क्या हुआ देखा जाने लगा। CBI ने रैली की प्लानिंग, परमिशन, सिक्योरिटी अरेंजमेंट और आयोजकों की भूमिका की फाइलें खोलीं। TVK के कई पदाधिकारियों से पूछताछ हुई, वीडियो फुटेज खंगाले गए और अंत में जांच सीधे विजय तक पहुंच गई। सोमवार को विजय दिल्ली पहुंचे और CBI मुख्यालय में पेश हुए। सूत्रों के मुताबिक़, उनसे सीधे सवाल पूछे गए रैली की तैयारियों में उनकी भूमिका क्या थी? भीड़ को लेकर क्या इनपुट थे? क्या सुरक्षा को लेकर कोई चेतावनी दी गई थी और अगर दी गई थी, तो उस पर क्या कार्रवाई हुई? CBI यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या यह सिर्फ़ प्रशासनिक चूक थी या आयोजकों ने भी खतरे को हल्के में लिया। राजनीतिक माहौल में यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है। विजय के समर्थक इसे उभरते नेता को दबाने की कोशिश बता रहे हैं, तो विरोधी कह रहे हैं कि स्टारडम के सहारे राजनीति करने वालों को जवाबदेही से भागने नहीं दिया जा सकता। सवाल यह नहीं है कि विजय दोषी हैं या नहीं सवाल यह है कि क्या कानून सबके लिए एक जैसा है? अब सबकी नज़र CBI की अगली चाल पर है। पूछताछ के बाद क्या चार्जशीट दाखिल होगी, या जांच अभी और लंबी चलेगी यह आने वाले दिनों में साफ़ होगा।