हैदराबाद के तप्पाचबूतरा इलाके में जिरा हनुमान मंदिर के अंदर मांस के टुकड़े मिलने के बाद माहौल गरमा गया है। हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। घटना के तुरंत बाद बड़ी संख्या में लोग मंदिर के बाहर इकट्ठा हुए और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे। यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया है। लेकिन हर बार प्रशासन और पुलिस इसे ‘संयोग’ बताकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देती है।
मंदिर के पुजारी ने जब सुबह पूजा के लिए मंदिर का दरवाजा खोला, तो शिवलिंग के पास मांस के टुकड़े देखे। यह देखकर वह स्तब्ध रह गए और तुरंत मंदिर समिति को सूचना दी। इसके बाद इलाके में यह खबर तेजी से फैल गई और मंदिर के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और डीसीपी चंद्र मोहन ने कहा कि "मंदिर के दरवाजे बंद थे, इसलिए संभव है कि कोई जानवर मांस का टुकड़ा अंदर लाया होगा।" लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर मंदिर के दरवाजे बंद थे, तो कोई जानवर अंदर आया कैसे? इस घटना ने हिंदू समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक शरारत नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश है ताकि धार्मिक सौहार्द को बिगाड़ा जा सके।
इस मामले को लेकर हैदराबाद के भाजपा विधायक राजा सिंह ने प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि "हर बार यही कहानी दोहराई जाती है। जब भी मंदिरों में मांस फेंक दिया जाता है, तो पुलिस कह देती है कि कोई जानवर इसे लाया होगा। क्या हर बार गलती सिर्फ कुत्ते-बिल्ली की होती है? यह सुनियोजित साजिश है, लेकिन प्रशासन चुप बैठा है।" उन्होंने आगे कहा कि अगर इस घटना के दोषियों को जल्द गिरफ्तार नहीं किया गया, तो जनता का गुस्सा और भड़क सकता है। हैदराबाद पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चार विशेष जांच टीमों का गठन किया है। सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है ताकि दोषियों तक पहुंचा जा सके। लेकिन पहले की घटनाओं को देखते हुए लोगों को संदेह है कि कहीं इस बार भी मामले को दबाने की कोशिश न की जाए।
अगर बीते कुछ वर्षों की घटनाओं को देखा जाए, तो धार्मिक स्थलों को अपवित्र करने की कोशिशें लगातार हो रही हैं। मंदिरों में इस तरह की घटनाएं कोई इत्तेफाक नहीं हो सकतीं। पहले भी कई बार मंदिरों में ऐसी हरकतें हुईं, लेकिन प्रशासन ने हमेशा यही कहकर मामला शांत करा दिया कि ‘जानवर मांस का टुकड़ा गिरा गया’ या फिर ‘यह एक शरारती तत्व की हरकत थी।’ अब जब इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं, तो यह साफ है कि कोई न कोई इसके पीछे साजिश रच रहा है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज किया जाएगा?