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Breaking News 11 February 2026

1 ) This Is Real India

आज जब दुनिया सुबह उठती है, तो आँकड़ों की एक लाइन quietly अपना मतलब बदल चुकी होती है... India अब दुनिया का सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश है। China पीछे छूट चुका है। कोई जश्न नहीं, कोई मातम नहीं बस एक सच्चाई है। अगर तुम भारत को ऊपर से देखो तो ये सिर्फ़ भीड़ दिखती है रेलवे प्लेटफ़ॉर्म, ट्रैफ़िक, गलियाँ, स्कूल की लाइन, अस्पताल के बाहर इंतज़ार। लेकिन अगर थोड़ा रुकें, तो समझ आएगा  ये भीड़ नहीं, समय है, जो एक साथ पैदा हो गया है। भारत की Average उम्र 28 साल के आसपास है।मतलब आधा देश अभी भी सीख रहा है, दौड़ रहा है, गुस्सा कर रहा है, सपने बना रहा है। दूसरी तरफ़ China बूढ़ा हो रहा है उसकी population घट रही है, उसकी factories में अब इंसान नहीं, robots ज़्यादा हैं। यहीं से बातें interesting होती है। Population अपने आप में ना blessing होती है, ना curse... Population एक raw force है जिसे अगर सही दिशा दें, तो वो इतिहास बदल देती है, और अगर ignore करें, तो वही force आपको कुचल देती है। भारत आज इसी चौराहे पर खड़ा है। दुनिया भारत को एक अजीब नज़र से देखती है। थोड़ा उम्मीद के साथ, थोड़ा डर के साथ। Global boardrooms में India को ऐसे describe किया जाता है “Messy but inevitable.”....Slow, chaotic, argumentative… लेकिन unavoidable। क्योंकि 140 करोड़ लोग सिर्फ़ काम करने वाले हाथ नहीं होते...वो buyers होते हैं, voters होते हैं, soldiers होते हैं, creators होते हैं। इतनी बड़ी domestic market दुनिया में कहीं और नहीं। लेकिन इसी कहानी का दूसरा हिस्सा भी उतना ही सच्चा है। अगर नौजवानों को काम नहीं मिला, अगर education सिर्फ़ degree बनकर रह गई, अगर cities गाँवों से भागते लोगों को absorb नहीं कर पाईं  तो यही youth dividend, social pressure cooker बन जाता है। Unemployment यहाँ सिर्फ़ economic issue नहीं है, ये dignity का सवाल है। Rural India को लेकर दुनिया की सोच अब भी अटकी हुई है। अब भी गाँव मतलब poverty, खेती मतलब backwardness... लेकिन reality इससे ज़्यादा complex है। गाँव अब offline नहीं हैं। Internet वहाँ भी है, UPI वहाँ भी है, aspiration वहाँ भी है। फर्क सिर्फ़ access और opportunity का है। Rural India पीछे नहीं है उसे आगे बढ़ने का रास्ता narrow दिया गया है। Technical तौर पर देखें तो भारत की population density डराने वाली है।
हर square kilometer में सैकड़ों लोग। Resources सीमित हैं पानी, ज़मीन, हवा....लेकिन philosophy ये कहती है कि scarcity से innovation पैदा होती है, और abundance से laziness। भारत के पास scarcity है अब सवाल ये है कि क्या हम innovation चुनते हैं या chaos? ये बात किसी government की नहीं, ये किसी policy की भी नहीं। ये कहानी उस बच्चे की है जो सरकारी स्कूल में बैठा है, उस graduate की है जो job portal refresh कर रहा है, उस किसान की है जो अगली generation के लिए शहर देख रहा है। Population ने भारत को मौका दिया है दुनिया की अगली बड़ी human story बनने का। लेकिन कहानी का अंत अभी लिखा नहीं गया। क्योंकि सच्चाई ये है India overcrowded नहीं है, India under-managed है। अगर management आ गया, तो यही population दुनिया की सबसे बड़ी ताक़त बनेगी। और अगर नहीं आया तो इतिहास यही कहेगा कि इतने लोग थे, लेकिन direction नहीं थी।

 

2 ) EVERYTHING You Need to Know About Naravane’s Book

भारत के पूर्व थलसेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की एक unpublished book इन दिनों देश की political और public discourse का हिस्सा बन चुकी है, किताब का नाम Four Stars of Destiny बताया गया है, जो अभी तक न तो market में आई है और न ही officially publish हुई है। इसके बावजूद इस किताब से जुड़े कथित अंश संसद में दिखाई दिए और सोशल मीडिया पर इसकी pre-publication material circulation की बातें सामने आईं। यहीं से यह मामला एक सामान्य publishing issue से निकलकर legal और political controversy में बदल गया। यह विवाद उस समय और गहरा हो गया जब लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस अप्रकाशित किताब के कुछ पन्नों का हवाला दिया। दावा किया गया कि यह content print से पहले का version है। इस पर सत्तापक्ष ने तीखी आपत्ति जताई और सवाल उठाया कि जब किताब officially released ही नहीं हुई, तो उसके pages संसद तक कैसे पहुंचे। इसके बाद सदन में हंगामा हुआ और यह मुद्दा public domain में आ गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस की Special Cell ने इस पूरे प्रकरण में FIR दर्ज की। जांच का फोकस इस बात पर है कि unpublished manuscript या उसका PDF version leak कैसे हुआ। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या यह मामला copyright violation, data breach या unauthorized circulation से जुड़ा है। चूंकि मामला एक former Army Chief से जुड़ा है, इसलिए sensitivity और security angle को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जांच के दौरान दिल्ली पुलिस ने publishing house Penguin Random House India को notice जारी किया। नोटिस में Penguin India से पूछा गया है कि किताब का manuscript किन-किन लोगों तक पहुंचा था, editorial और production process में कौन-कौन शामिल था, और क्या किसी level पर confidentiality breach हुई। पुलिस का मानना है कि जब तक leak source clear नहीं होता, तब तक जिम्मेदारी तय करना संभव नहीं है। Penguin Random House India ने अपने official statement में साफ कहा है कि Four Stars of Destiny अभी तक publish नहीं हुई है और न ही किसी format में public distribution के लिए उपलब्ध कराई गई है। Publishing house के अनुसार अगर कोई PDF या printed material circulation में है, तो वह unauthorized है और clear तौर पर copyright infringement के दायरे में आता है। Penguin ने यह भी कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग करेगी और जरूरत पड़ी तो legal action भी लिया जाएगा। इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है क्या unpublished books और confidential manuscripts अब पूरी तरह secure हैं? Publishing industry में editorial drafts, proof copies और digital files आमतौर पर limited access में रहते हैं। ऐसे में किसी pre-print content का बाहर आना system failure की ओर इशारा करता है। Experts मानते हैं कि यह मामला future में publishing protocols और data security norms को और strict बना सकता है। राजनीतिक स्तर पर भी यह विवाद शांत नहीं हुआ है। विपक्ष इसे freedom of expression और सवाल पूछने के अधिकार से जोड़कर देख रहा है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि संवेदनशील और unpublished material का misuse national interest के खिलाफ हो सकता है। संसद से लेकर सोशल मीडिया तक यह मुद्दा अब सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि transparency, accountability और information control पर बहस बन चुका है। फिलहाल, पूरा मामला जांच के अधीन है। Delhi Police की inquiry यह तय करेगी कि leak के पीछे negligence थी, internal breach था या जानबूझकर content circulate किया गया। Penguin India का जवाब, technical evidence और digital trail इस केस की दिशा तय करेंगे। एक बात साफ है यह विवाद publishing world, politics और law enforcement तीनों के लिए एक serious test बन चुका है।